*शीर्षक: जयपुर – वो गुलाबी शहर जहाँ हर गली कोई कहानी कहती है* 💗🏰*

*जयपुर गुलाबी क्यों है ?*
150 साल पुरानी मेहमान नवाज़ी 1876 की बात है। प्रिंस ऑफ वेल्स भारत आने वाले थे। महाराजा सवाई राम सिंह ने पूरा शहर ‘गुलाबी’ रंग से रंगवा दिया। क्यों? क्योंकि गुलाबी रंग मेहमान नवाज़ी का प्रतीक माना जाता है। तब से नाम पड़ गया – पिंक सिटी।

*जयपुर शहर बसाने वाला बहादुर राजा, महाराजा सवाई जयसिंह की कहानी*
1727 की बात है। आमेर का राजा था सवाई जय सिंह द्वितीय। सिर्फ 11 साल की उम्र में राजा बन गया था। पर दिमाग से बूढ़ा, दिल से जवान। *3 बातें जो उसे बहादुर बनाती हैं:*1. *दूरदर्शी प्लानर*: आमेर की पहाड़ियों में पानी की कमी थी, आबादी बढ़ रही थी। राजा ने कहा “नया शहर बसाऊँगा”। वो भी वास्तु शास्त्र से। जयपुर भारत का पहला ‘प्लान्ड सिटी’ है। 9 चौक, चौड़ी सड़कें – 300 साल पहले ही।
विज्ञान का दीवाना: युद्ध के साथ-साथ तारों से भी लड़ता था। जंतर मंतर बनवाया। यूरोप से दूरबीन मँगवाई, खुद किताबें लिखीं। खगोलशास्त्री राजा था भाई।3. *कूटनीति का उस्ताद*: मुगलों से दोस्ती रखी, मराठों से भी रिश्ता निभाया। औरंगज़ेब के दरबार में भी इज़्ज़त थी। तलवार के साथ-साथ दिमाग से राज किया।
सोचो, 300 साल पहले एक राजा था जो शहर बसाने से पहले गणित लगाता था। जिसने कहा कि मेरी प्रजा को धूप और हवा बराबर मिले। उसी ने जयपुर बसाया। इसीलिए आज भी जयपुर की गलियाँ सीधी हैं और हवा महल की हवा ठंडी।
*जयपुर के 5 प्रसिद्ध स्थान*
- हवा महल – 953 खिड़कियों वाला अजूबा* बिना नींव का 5-मंज़िला महल। 953 झरोखे, पर एक भी सीढ़ी नहीं। राजपूत रानियाँ यहाँ से बिना दिखे शहर के जुलूस देखती थीं। सुबह 8-9 बजे जाओगे तो सूरज की रोशनी में महल सोने जैसा चमकेगा।

आमेर का किला – शीश महल का जादू* शहर से 11 किमी। हाथी की सवारी या जीप से ऊपर जाओ। अंदर शीश महल है। एक दिया जलाओ, पूरा महल तारों जैसा चमकने लगता है। रात का लाइट एंड साउंड शो मिस मत करना – इतिहास कानों में गूँजता है।

. जंतर मंतर – 300 साल पुराना गूगल* यह यूनेस्को साइट है । दुनिया का सबसे बड़ा पत्थर का सनडायल यहीं है। समय 2 सेकंड की गलती में बताता है। महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1734 में बनवाया था।

*जल महल, जयपुर – पानी में तैरता राजसी ख्वाब* 💧👑*परिचय: जब झील खुद महल बन जाए*गुलाबी नगरी जयपुर के बीचों-बीच, मान सागर झील की शांत लहरों पर तैरता हुआ एक महल है – *जल महल*। दूर से देखने पर लगता है जैसे कोई जादुई महल पानी पर रख दिया गया हो। ये सिर्फ पत्थर की इमारत नहीं, राजपूताना शान और कारीगरी का वो नमूना है जो हर देखने वाले को मंत्रमुग्ध कर देता है। 18 वीं शताब्दी में *महाराजा माधो सिंह प्रथम* ने इसे बनवाया था। असल में ये राजाओं के लिए *शिकारगाह* थी। गर्मियों में राजा-महाराजा यहां बत्तखों का शिकार करने आते थे। *फिर जीर्णोद्धार* बाद में *महाराजा जय सिंह द्वितीय* ने 18 वीं शताब्दी में ही इसका जीर्णोद्धार करवाया और इसे और खूबसूरत बनाया। *नाम का राज* “जल महल” यानी पानी का महल – नाम एकदम सटीक है क्योंकि इसकी *5 में से 4 मंजिलें* पानी के अंदर डूबी रहती हैं। हम जो देखते हैं वो सिर्फ सबसे ऊपर की मंजिल है!–-*वास्तुकला: पानी और पत्थर का अद्भुत मिलन** राजपूत-मुगल शैली* लाल बलुआ पत्थर से बना ये महल राजपूत और मुगल वास्तुकला का बेजोड़ मिश्रण है। छतरियां, झरोखे, और नक्काशी देखकर आंखें खुली रह जाती हैं।* 5 मंजिला रहस्य* महल 5 मंजिला है, लेकिन जब झील पूरी भरी होती है तो सिर्फ 1 मंजिल दिखती है। बाकी 4 मंजिलें पानी के अंदर छुपी रहती हैं। गर्मियों में जब पानी कम होता है, तो नीचे की मंजिलें भी झांकती हैं। *छत पर बगीचा* सबसे ऊपर की मंजिल पर *चामुंडा माता का मंदिर* और एक सुंदर बगीचा भी था। राजा यहां से अरावली पहाड़ियों और नाहरगढ़ किले का नजारा लेते थे।-
